Hindi paragraph Rachna or Nibandh on Pradushan Ek Samasya | Pollution and Environment | प्रदूषण - एक समस्या | प्रदूषण और पर्यावरण

 

  Hindi Paragraph Essay (Rachna or Nibandh) on Pradushan Ek Samasya 

(Pollution and Environment) 

प्रदूषण - एक समस्या | प्रदूषण और वातावरण | प्रदूषण और पर्यावरण

Hindi Essays (Nibandh) for Class 6 - 12 School and Board Exams

प्रकृति एवं मनुष्य का अटूट संबंध है। मनुष्य का सुखी जीवन संतुलित प्राकृतिक पर्यावरण पर निर्भर करता है। संतुलित पर्यावरण में सभी तत्व एक निश्चित अनुपात में होते हैं, किंतु जब पर्यावरण का इन्हीं तत्वों की मात्रा अपने निश्चित अनुपात से बढ़ जाती है, या पर्यावरण (वातावरण) में विषैल तत्वों का समावेश हो जाता है तो वह पर्यावरण या वातावरण प्राणियों के जीवन के लिए घातक बन जाता है। पर्यावरण का इस असंतुलन को ही 'प्रदूषण' (Pollution) की संज्ञा दी जाती है।

Hindi paragraph Rachna or Nibandh on Pradushan Ek Samasya | Air, Water, Sound Pollutions

आधुनिक मानव सभ्यता की बढ़ती आवश्यकताओं के कारण प्राकृतिक संतुलन बदल रहा है तथा प्रदूषण बढ़ रहा है। प्रदूषण के विभिन्न रूप हो सकते हैं, जिसमें वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण प्रमुख हैं।

वायु प्रदूषण (Air Pollution) सबसे अधिक व्यापक व हानिकारक है। वायुमंडल में आवश्यक गैसें एक निश्चित अनुपात में मिश्रित हैं। वायुमंडल में यदि ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाए और कार्बन डाइ-ऑक्साइड, सल्फर डाइ-ऑक्साइड, कार्बन मोनो-ऑक्साइड आदि की मात्रा बढ़ जाए तो वायु प्रदूषण बढ़ने लगता है। यातायात के साधनों से निकलनेवाला पेट्रोल और डीजल का धुआं वायु प्रदूषण को फैलाता है। वृक्षों की अंधाधुंध कटाई से वातावरण में ऑक्सीजन की कमी और कार्बन डाइ-ऑक्साइड की वृद्धि हो रही है।

जल सभी प्राणियों के जीवन के लिए एक अनिवार्य वस्तु है। जल में अनेक उपयोगी तत्व घुली होती हैं। यदि इन तत्वों की मात्रा आवश्यकता से अधिक या कम हो जाती है तो जल प्रदूषित हो जाता है। जल-प्रदूषण रोग उत्पन्न करनेवाले जीवाणु, विषाणु, कल-कारखाना से निकले हुए वर्जित पदार्थ, कीट-नाशक पदार्थ व रासायनिक खाध से हो सकता है। ममहानगरों में भारी मात्रा में गंदे पदार्थ नदियों के पानी में प्रवाहित किये जाते हैं, जिससे इन नदियों का जल प्रदूषित होकर हानिकारक बनता जा रहा है।

र्आजकल अनेक प्रकार के वाहन, लाउडस्पीकर, बाजे एवं औद्दोगिक संस्थानों की मशीनों के शोर ने ध्वनि-प्रदूषण को जन्म दिया है। ध्वनि प्रदूषण से केवल मनुष्य की श्रवण-शक्ति का ही ह्रास नहीं होता है, बल्कि उसके मस्तिष्क पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ता है।

प्रदूषण की वृद्धि के लिए मुख्य रूप से मानव ही उत्तरदायी है। आधुनिक मानव सभ्यता की बढ़ती आवश्यकताओं के कारण ही प्रदूषण बढ़ रहा है। अपने सुखी जीवन के लिए हमें इस प्रदूषण से मुक्ति पानी होगी। नहीं तो आज प्रदूषित वातावरण में रहकर हम अपनी मृत्यु को स्वयं ही निमंत्रण दे रहें हैं। यद्यपि विश्व के सभी देश प्रदूषण की समस्या के समाधान के लिए चेष्टा कर रहे हैं, फिर भी औद्दोगिक विकास, नगरीकरण, वनों का विनाश और जनसंख्या में अतिशय वृद्धि होने के कारण यह समस्या निरन्तर गंभीर होती जा रही है। इसलिए प्रदूषण को निराकरण हेतु हमें यातायात के प्रदूषण को रोकना होगा, वृक्षरोपण बढ़ाना होगा, ऊँची आवाज़ वाले वाहनों तथा मशीनों पर रोक लगानी होगी, पेयजल को शुद्ध करना होगा, रासायनिक खाध तथा कीट-नाशकों की अत्यधिक व्यवहार पर रोक लगाना होगा एवं ऐसे ही अन्य उपाय करके इस धरती के वातावरण को प्रदूषण मुक्त बनाना होगा तभी मानव जीवन सुखमय हो सकता है।

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