Vyayam - Hindi Essay Rachna Nibandh व्यायाम

 

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Vyayam (व्यायाम)

Essay Paragraph in Hindi (Nibandh Rachna) important for School, Board Exams for Class 7 to Class 12 

Vyayam - Hindi Essay Rachna Nibandh व्यायाम- CBSE Hindi Guide
'पहला सुख निरोगी काया' उक्ति के अनुसार स्वस्थ शरीर मानव का सर्वोत्तम सुख है। यदि हमारा शरीर और मन दोनों स्वस्थ हैं तो सारे संसार के सुखों को भोगा जा सकता है, किंतु शारीरिक या मानसिक अस्वस्थता से हमारा मानव जीवन भी एक अभिशाप बन जाता है। रोगी व्यक्ति दूसरों के लिए तो कुछ कर ही नहीं सकता, अपने लिये भी बोझ बन जाता है। स्वास्थ्यहीन व्यक्ति प्रायः अविवेकी, विचारशून्य, मुर्ख, आलसी, अकर्मण्य, हठी, क्रोधी आदि कई दुर्गुणों का भण्डार होता है। अतः, स्वास्थ्य को जीवन में सबसे र्आवश्यक और महत्वपूर्ण माना गया है।

स्वास्थ्य का मूलमंत्र व्यायाम है - "व्यायामांपुष्ट गात्राणि"। इसलिए शरीर को स्वस्थ रखने के लिए व्यायाम बहुत ज़रूरी है। व्यायाम करने से मनुष्य चुस्त-दुरुस्त रहता है। इससे जीवन में स्फूर्ति आती है।

व्यायाम के अनेक प्रकार हैं। खेल-कूद, जिम्नास्टिक, योग, आसन, दौड़ना आदि व्यायाम के अंतर्गत आते हैं। अनेक खेल ऐसे हैं जिनसे व्यायाम के साथ-साथ मनोरंजन भी होता है। लेकिन व्यायाम करते समय व्यक्ति को अपनी अवस्था और शारीरिक क्षमता का ध्यान रखकर व्यायाम का चुनाव करना चाहिए। किसी व्यायाम विशेषज्ञ के परामर्श से ही व्यायाम करना चाहिए। हमें ऐसा व्यायाम नहीं करने चाहिए जिन्हें हमारा शरीर स्वीकार न करता हो। हर आयु वर्ग के लोगों को हल्के-फुल्के व्यायाम अवश्य ही करने चाहिए। विद्यार्थी जीवन में युवावस्था वाले व्यायाम करने चाहिए। इस आयु वर्ग में शरीर की आधारशिला बनती है जिनके कारण व्यायाम अति आवश्यक एवं उपयोगी होता है।

व्यायाम साधारणतः खुली और ताज़ी हवा में करना चाहिए। व्यायाम करते समय शरीर हल्का और पेट साफ होना चाहिए। व्यायाम का उचित समय प्रातःकाल एवं सायंकाल है। भोजन के बाद नहीं करना चाहिए। अनुचित ढंग से किया गया व्यायाम लाभ की अपेक्षा हानि करता है।

संक्षेप में हम यह कह सकते हैं कि व्यायाम जीवन को सुखी बनाने का महत्वपूर्ण साधन है। इससे हमारे जीवन में विश्वास पैदा होने के साथ-साथ हमारी आयु भी बढ़ जाती है। जीवन को सुंदर, स्वस्थ और शरीर को नीरोग रखने का सर्वोत्तम उपाय है 'व्यायाम'। स्वस्थ शरीर के बारे में ठीक ही कहा गया है -
'शरीरमादयं खलु धर्म साधनम।'


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