Hindi Essay Doordarshan - Television | Durdarshan - हिंदी निबंध दूरदर्शन

 

Hindi Essay Doordarshan (Television - Durdarshan) 

हिंदी निबंध 'दूरदर्शन'

Hindi Essays (Rachna / Nibandh) for Class 6, Class 7, Class 8, Class 9, Class 10, Class 11, Class 12

दूरदर्शन या टेलीविज़न विज्ञान की मानव को एक नवीनतम देन है। 'टेलीविज़न' के लिए भारत में 'दूरदर्शन' एक पंजीकृत नाम है। इसके माध्यम से हम सुदूर घटित होने वाले दृश्यों को तत्क्षण देख एवं सुन सकते हैं।

दूरदर्शन से लाभ (Doordarshan se Labh)

टेलीविज़न का आविष्कार सन् १९२६ में इंग्लैंड के वैज्ञानिक जॉन बेयर्ड ने किया था। सन् १९५५ में अमरीकी वैज्ञानिकों ने रंगीन टेलीविज़न को जन्म दिया। भारत में प्रथम दूरदर्शन केन्द्र की स्थापना सितम्बर, १९५२ को राजधानी दिल्ली में हुई थी, परन्तु इसकी सार्वजनिक प्रसारण अगस्त, १९६५ से प्रारम्भ हुआ। अब तो इस देश में सुविधा बढ़ने के साथ-साथ टेलीविज़न की लोकप्रियता घर-घर में तथा शहर से लेकर देश के प्राय सभी गाँव तक पहुँच गयी है, चाहे वह क्षेत्र पहाड़ी हो या कितनी भी अंदरुनी हो।

दूरदर्शन की उपयोगिता मनोरंजन और सामूहिक शिक्षा की दृष्टि से काफ़ी महत्त्वपूर्ण है। दूरदर्शन शिक्षा, मनोरंजन तथा सूचना प्राप्ति का बहुत बड़ा साधन है। इसके द्वारा न केवल किसी व्यक्ति की आवाज़ बल्कि उसकी शक्ल-सूरत, चाल, गतिविधियाँ आदि सबकुछ एक साथ देखा और सुना जा सकता है। इससे किसी घटना की सच्चाई को जांच करने में मदद मिलती है। इसी वजह से न्यायालयों को भी कई बार अपना काम के लिए दूरदर्शन की मदद लेनी पड़ती है। भारत जैसे देश में जहाँ अधिकांश लोग लिखना-पढ़ना नहीं जानते, वहाँ टेलीविज़न निरक्षरता दूरीकरण के लिए बहुत मददगार साबीत हो सकता है। दूरदर्शन प्रचार एवं विज्ञापनों का भी एक प्रमुख साधन है जिसके चलते व्यावसायिक दृष्टिकोण से भी यह अत्यंत महत्त्वपूर्ण हो गया है। इन सबके अलावा चाहें वह खेल-कुंद के माध्यम से हो या कोई राष्ट्रिय त्यौहार, भारत जैसे विशाल देश को एक सूत्र में बांधे रखने में भी दूरदर्शन की भूमिका बहुत सराहनीय रही।    

दूरदर्शन से हानि (Doordarshan se Hani)

टेलीविज़न से अनेक हानियाँ भी हो रही हैं। ज़्यादा समय तक इसके सामने बैठे रहने से आँखों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। विद्यार्थियों का समय नष्ट होता है। वे दूरदर्शन के माध्यम से अश्लीलता ग्रहण करते हैं, जिसका प्रभाव उनके चरित्र पर पड़ रहा है। यह भारतीय संस्कृति की हत्या है। अतः, हमें टेलीविज़न का प्रयोग एक सीमा तक ही करनी चाहिए।

निष्कर्ष (Conclusion)

लेकिन इन सब बातों के बावजूद भी आधुनिक युग में दूरदर्शन की व्यापक उपयोगिता को भुलाया नहीं जा सकता। आज के दिन भारतीय समाज में टेलीविज़न न केवल प्रतिष्ठा व सम्मान का प्रतीक माना जाता है बल्कि, यह एक अत्यंत उपयोगी साधन भी बन गया है। दूरदर्शन में ऐसे निर्माणकारी कार्यक्रम प्रस्तुत करने चाहिए ताकि मनोरंजन के साथ-साथ शिक्षा, कृषि की उन्नति, स्वास्थ रक्षा, परिवार-कल्याण, मौसम-सम्बंधी और सरकारी आदि सभी सूचनाएँ समान रूप से प्रचार हो सकें। ऐसे कार्यक्रम ही दूरदर्शन की सच्ची सार्थकता सिद्ध कर पाएँगें।

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