CBSE Hindi Guide - Class 10 NCERT Kshitij Bhag 2 - Kavitt by Dev देव - Extra important questions answers

 

CBSE Hindi Guide - Class 10 NCERT Kshitij Bhag 2

Hindi Poem Kavitt by Dev

कवित्त  (देव)

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Question: कवि देव के अन्य रचनाओं के आधार पर उनकी काव्यगत विशेषताएँ - भाषा-शैली, अलंकार आदि के बारे में चर्चा कीजिये। 
Answer: 
काव्यगत विशेषताएँ: रीतिकालीन कवियों में देव को अत्यंत प्रतिभाशाली कवि माना जाता है। उनकी रचनाओं में प्रेम और सौंदर्य का अत्यंत मार्मिक चित्रण देखने को मिलता है। उनकी काव्यों में विपुल कल्पना-शक्ति का परिचय मिलता है।



भाषा-शैली: देव की भाषा साहित्यिक ब्रज है। कविताओं में ध्वन्यात्मकता एवं आलंकारिकता उत्पन्न करने के लिए उन्होंने शब्दों को तोड़ा-मरोड़ा भी है। यही कारण है कि कुछ समीक्षक मानते हैं की देव के काव्यों में शब्दों का अपव्यय अधिक मिलता है और अर्थ कम। देव रीतिकालीन परंपरा का अनुसरण करते हुए अपने काव्य ग्रंथों में मुक्तक शैली का ही प्रयोग किया है।




अलंकार: देव की रचनाओं में अलंकार-प्रियता सर्वत्र दृष्टिगत होती है। दरबारी वैभव-विलास के अलंकरण का प्रभाव उनकी कविताओं पर भी पड़ा है। उनके काव्य में अनुप्रास और यमक के प्रति प्रबल आकर्षण है। उन्होंने अनुप्रास द्वारा बहुत ही सुन्दर ध्वनिचित्र खींचे हैं।

इनके अलावा देव की रचनाओं में उपमा, रूपक, उत्प्रेक्षा आदि अलंकार भी देखने को मिलते हैं।

रस-योजना: देव के काव्यों में श्रृंगार रस की प्रधानता है। उन्होंने श्रृंगार के संयोग और वियोग दोनों ही पक्षों का मार्मिक चित्रण किया है।

Question: कवित्त कविता का सार (भावार्थ) संक्षेप में लिखिए।
Answer: पहले कवित्त में कवि देव वसंत ऋतू का वर्णन एक बालक के रूप में किए हैं। वसंत रूपी बालक के लिए प्रकृति ने मानो वृक्ष और लताओं का बिछौना तैयार किया है। उसमें वसंत रूपी बालक के शरीर पर फूलों का झबला उसे अत्यधिक सुशोभित कर रहा है। उसे प्यार से दुलारने के लिए कभी पवन झूला झुलाती है, तो कभी मोर, तोता, कोयल आदि उसे अपने मधुर गायन से गुदगुदाते हैं। कंजकली की लताएँ नायिका की साड़ी प्रतीत हो रही है, जिसमे लिपट कर वह पराग के कण लूटा रही है। कामदेव के इस वसंत रूपी बालक को रिझाने के लिए प्रातःकाल गुलाब का फूल प्रतिदिन चुटकी बजाता है। 

दूसरे कवित्त में कवि देव ने चाँदनी रात के रुपहले प्रकाश का अत्यंत आकर्षक चित्रण किया है। धरती पर चाँदनी इस तरह से फ़ैल गई है, जैसे स्फटिक शिलाओं का कोई सुंदर चमचमाता महल बना हो। चाँदनी रात की सुंदरता में समुद्र का जल भी दही के समान प्रतीत हो रहा है। 

कवि की कल्पना में आकाश में तारा युवती के रूप में खड़ी हुई झिलमिल सी हो रही है। उसमे मोतियों की कांति और मल्लिका के फूलों का रसमिला हुआ है। दर्पण के समान प्रतीत हो रहे आकाश में व्याप्त चाँदनी उसकी आभा अर्थात् चमक जैसी लग रही है। और चन्द्रमा प्यारी राधा के प्रतिबिम्ब जैसा प्रतीत हो रहा है।



Question: इस  कविता में कवि ने वसंत को किस रूप में चित्रित किया है? 

Answer: कवित्त में कवि देव ने वसंत को कामदेव रूपी महाराज के बालक के रूप में चित्रित किया है, जिसने फूलों का झबला पहन रखा है। कामदेव के इस वसंत रूपी बालक को रिझाने के लिए प्रातःकाल गुलाब का फूल प्रतिदिन चुटकी बजाता है।  



Question: कमल की कली ने कैसा रूप धारण किया है ? यह वसंत रुपी बालक के लिए क्या कर रही है ?
Answer: कमल की कली ने सर पर लताओं की साड़ी डाल कर नायिका का रूप  लिया है।  वह सम्पूर्ण पराग रुपी राई-नमक से वसंत रुपी बालक की नज़र उतार रही है।   




Question: कवित्त में  कवि आकाश की तुलना किससे की है? उसमे चाँदनी और चंद्रमा में किस-किस का आभास हो रहा है ? 

Answer: कविता में आकाश को दर्पण की तरह बताया गया है. चाँदनी उस दर्पण की आभा की तरह लग रही है। आकाश में खिला हुआ चन्द्रमा कृष्ण की प्रेयसी राधा के प्रतिबिम्ब सामान प्रतीति हो रही है।      



Question: कवित्त में युवती के रूप में किसे चत्रित किया गया है? उसकी सुंदरता का वर्णन देव ने किस प्रकार से किया है ? 

Answer: इस कविता में युवती के रूप में आकाश में व्याप्त तारा को चित्रित किया गया है। वह ऐसे झिलमिला रही है मानो उसके झिलमिलाहट में मोतियों की ज्योति मिली हुयी है।  वह मल्लिका के पुष्परज से सुगन्धित हो रही है।    






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